Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 50, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
इति सप्तविधो भेदो जीवानां कथितस्तव ।
समुद्राणामिव मया बुद्ध्वा श्रेयःपरो भव ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, समुद्रों की तरह सात
प्रकार के जीवों का भेद मैंने आप से कहा आप इनका भलीभाँति परिज्ञान करके कल्याणरूप
वस्तु में तत्पर हो जाइए