Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
अवाच्यमनभिव्यक्तमतीन्द्रियमनामकम् ।
सर्वभूतात्मकं शून्यं सदसच्च परं पदम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
वह परमपद वाणी का अविषय, अनभिव्यक्त,
इन्द्रियों का अविषय, नामरूप शून्य, सर्वभूतस्वरूप, शून्यरूप, सत् एवं असत् भी है