Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 52, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यदिदं दृश्यते किंचिज्जगत्स्थावरजंगमम् ।
सर्वं सर्वप्रकाराढ्यं कल्पान्ते तद्विनश्यति ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अनुभव में आरुढ़ इस विवर्त पक्ष को दिखनाकर अन्य पक्षों में दोष बतलाने की आधिनाषा कर
रहे महाराज वस्तिष्ठजी असत्य प्रयव का ही ब्रह्म के साथ वृक्षशाखा न्याय से अभेद माननेवाले
महानुभावो के पक्ष में - ब्रह्म की अविनाशिता नष्ट होगी - यह दोष दिखलाने के लिए जयत् में
विनश्वरत्व की प्रतिज्ञा करते हैं ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, जो कुछ स्थावर-जंगमात्मक यह सब तरह से परिपूर्ण जगत् दिखाई देता है
वह सब कल्प के अन्त में नष्ट हो जाता है