Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 53, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 53, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मविष्ण्वीश्वराद्यन्ते महाप्रलयनामनि ।
शब्दार्थे रूढिमापन्ने यच्छुद्धमवशिष्यते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सबका विनाश हो जाने पर जो वस्तु अन्त में बच जाती है, वही सव वस्तुओं की भावरूप सत्ता
है, क्योकि भ्रू धातु से बना हुआ भावशब्द उसी अर्थ का बोधक हैं, इस आशय से कहते हैं ।
चूँकि ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर आदि का भी जिस में अन्त हो जाता है, ऐसे महाप्रलय में
नामरूपात्मक सृष्टि का तिरोभाव हो जाने पर वही एकमात्र शुद्ध बच जाता है, इसलिए वही
सबकी सत्ता है, दूसरी नहीं