Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
कस्मिश्चिदेककोणेऽत्र कृत्वा कल्पनया कुटीम् ।
वज्रोदरदृढं तस्यामन्तस्तिष्ठाम्यवासनम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके किसी एक कोने में कल्पना से एक कुटिया का
निर्माणकर उसके भीतर वासनारहित तथा वज्र के उदर के सदृश दृढ़ होकर मैं वैद