Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

अहं विदितवेद्यत्वात्कदाचित्पूर्णमानसः । त्यक्तुमिच्छुरिमं लोकव्यवहारं घनभ्रमम् ओ ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामभद्र, किसी समय की बात है-मैंने ज्ञानयोग्य वस्तु का ज्ञान कर लिया था और मेरा मन भी पूर्ण हो चुका था, अतः उस समय मैंने घने भ्रम से भरे इस लोकव्यवहार को छोड़ देने की इच्छा की