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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 58, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । सर्वत्र सर्वदा सर्वमस्तीति प्रतिपादने । पाषाणाख्यानदृष्टान्तो मयायं तव कथ्यते ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, “सब कुछ सर्वदा सभी जगह है", यह जो प्रतिपादन करना है, इसी अर्थ में पाषाणाख्यायिका का दृष्टान्त दिया गया है, इसका किस तरह सादृश्य घटता है, इसे मैं आपसे कहता हूँ