Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
स्त्रीस्वभावादिव मृदु मधुरं वा निनादि वा ।
स्वल्पाङ्गत्वादनिर्ह्रादि मया तद्वाक्यमूहितम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी स्त्री के
कण्ठ से उत्पत्ति जनित स्वभावविशेष से मानों यह ध्वनि मृदु, मधुर ओर अनुकरणनशील प्रतीत
हो रही है, ऊँची भी नहीं है, अतएव वह कहीं दूर से नहीं सुनाई देती अर्थात् पास की ही
है, यों उस ध्वनि के विषय में मैने अनुमान किया