Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

त्वादृशानुभवेहानामगम्याभ्यागतानि च । असमञ्जसरूपाणि कथ्यमानानि मादृशैः ओ ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

इसीलिए अन्यवस्तु का अन्यत्र वर्णन करने पर अपरिनिष्ठित बुद्धिवालों की द्वष्टि मेये अगम्यता के कारण असमजसरूप शासते हैं; यह कहते हैं । आपके-जैसे पुरुषों के अनुभव और प्रयत्न के अविषय जो पदार्थ हैं, वे यदि सामने आ जायें और मेरे-जैसे पुरुष उनका वर्णन करें, तो भी उनका स्वरूप असमंजस ही लगेगा, यानी उनके स्वरूप का ज्ञान बिनअनुभवी पुरुष को हो ही नहीं सकता, ऐसे भी पदार्थ कहीं पर थे