Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
कानिचित्तानि तान्येव भूत्वा भूत्वा भवत्यलम् ।
कानिचित्तादृशान्येव जातानि वनपर्णवत् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ सर्ग तो ऐसे देखे कि वन के पत्तों के सदृश वे ही
फिर सद्रूप उत्पन्न हो होकर नष्ट होते जाते थे और फिर उत्पन्न होते जाते थे एवं कुछ उन्हीं के
सदृश ही उत्पन्न होते थे