Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तदाकर्ण्याशु तत्रेदमहं चिन्तितवानथ ।
शाब्दिकान्वीक्षणात्पश्यन्दिशो दश सविस्मयः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसे सुनकर वहाँ मुझे वड़ा ही विस्मय हुआ । उक्त
शब्दकर्ता के अन्वेषण के निमित्त से मैने दसों दिशाएँ देख डालीं बाद में मैं यह सोचने लगा