Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
पौरुषस्य महत्त्वस्य सत्त्वस्य महतः श्रियः ।
इन्द्रियाक्रमणं साधो सीमान्तो महतामपि ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे साधो, तत्त्वज्ञानियों की भी अपने पौरुष, महत्त्व, महाधेर्य ओर विश्रान्तिसम्पत्ति
की अवधि इन्द्रियों के ऊपर विजय प्राप्त करना ही है