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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

आपातमधुरारम्भा भङ्गुरा भवहेतवः । अचिरेण विकारिण्यो भीषणा भोगभूमयः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भोग की भूमियाँ आरम्भ में आपाततः रमणीय प्रतीत होती हैं। क्षण में ही विलीन हो जाती हैं, उनसे अनेक तरह के संसार उत्पन्न होते हैं, तत्काल ही उनमें विकार पैदा हो जाता है तथा उनका भीषण परिणाम होता है