Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
देवासुरनरागारघर्घराक्रन्दकर्कशान् ।
सप्तार्णवमहापूरपूरितार्केन्दुमण्डलान् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
देवता, दानव और मनुष्य के घरों के घर्घर क्रन्दनध्वनियोंसे, जो अतिकर्कश हैं तथा
चुलोक तक सात समुद्रों को बढ़ाकर उनकी महाबाढ़ से जो सूर्य एवं चन्द्र के मण्डलों को भी जल
से भर देते हैं, उन कल्पान्तों को वे जगत् परस्पर नहीं देखते