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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

शब्दं पश्चात्तमश्रौषमहं वीणास्वनोपमम् । क्रमात्स्फुटपदं जातं तत आर्यात्वमागतम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

जब मेँ उक्त आकाशरूप बन गया, तब मैंने वीणा के शब्द के सदुश शब्द सुना, क्रमशः उसके पद भी स्फुट हो गये, फिर मुझे यह भी मालूम होने लगा कि ये शब्द आर्या छन्द के हैं