Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
पाषाणमौनप्रतिमं नकिंचिदभिशब्दितम् ।
यत्तत्किंचिदिति द्योतरूपं ब्रह्म जगत्स्मृतम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो ब्रह्मरूप पाषाण के सदुश सब
तरह के वाणी के व्यापारं से रहित हैं, समस्त नाम और रूपों से शून्य है और प्रकाशरूप है, वही
कुछ नामरूपात्मक बन जाता है और वही जगत् के वेष में स्मृत है