Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
आलोलमाल्यवसनामलकाकुललोचनाम् ।
लोलद्धम्मिल्लवलनामन्यां श्रियमिवागताम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके गले की माला और पहिने हुए वस्त्र खूब फरफरा रहे थे,
उसके लोचन कानों के केशो को भी व्याकुल किये थे उसके माथे की वेणी बड़ी ही चंचल थी, मालूम
ऐसा होता था, मानों साक्षात् लक्ष्मी ही आई हुई हैं