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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verses 42–43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verses 42–43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

दारुण्यश्मनि भित्तौ च चञ्चलाः शालभञ्जिकाः । देवाङ्गनाभिः सहितं गायन्ति कथयन्ति च ॥ ४२ ॥ मेघान्परिदधत्युच्चैर्भूतान्युच्चैः पटानिव । प्रतिवर्षं विजातीयान्युत्पद्यन्ते फलान्यगे ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं लकड़ी, पत्थर और दीवार के ऊपर निर्मित पुतलियाँ देवांगनाओं के साथ गान और वार्ता करती हैं