Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 61, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
यह जगत् उस महाचिति का शरीर है,
महाचिति तो नष्ट होती नहीं, इसलिए उसके विनाश के बिना जगत् कैसे नष्ट हो सकता है २।