Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 62, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
यथा द्रष्टामलं व्योम दृश्यं तद्वद्गतं तथा ।
स्वप्नरूपजगत्युच्चैर्जगत्त्वेनामलं नभः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे द्रष्टा और दृश्य दोनों निर्मल चिदाकाश ही हैं, वैसे ही द्रष्टा और दृश्य के मध्य में
पड़ा दर्शन भी चिदाकाशरूप ही है । हे श्रीरामचन्द्रजी इस महान् स्वप्नरूप जगत् में जगत्-रूप से
निर्मल चिदाकाश ही स्थित है