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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

क्वचिदाह्लादजनकः साधूनामिव संगमः । क्वचिदुद्वेगजनको मूर्खैरिव समागमः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सज्जनो की संगति आह्वाद को पैदा करती है, वैसे ही यह कहीं पर अत्यन्त ही आह्वाद को पैदा करता है तथा जैसे मूर्खो के साथ का समागम उद्वेग पैदा करता है, वैसे ही यह कहीं पर उद्वेग को भी पैदा करनेवाला है