Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
क्वचिदप्राप्तसोमांशुः क्वचिदप्राप्तसूर्यभाः ।
क्वचिल्लोकमयस्तेन क्वचिदाशून्यदिक्तटः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो इसमें चन्द्रमा की किरणे ही जाने नहीं पाती, कहीं पर सूर्य
की ही किरणें नहीं जाने पाती, कहीं पर तो इसमें मनुष्य ही मनुष्य भरे पड़े हैं और कहींपर इसकी
दिशाएँ जनों से एकदम शून्य हैं