Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
क्वचिन्नित्यं वहद्वाताजातस्थावरजङ्गमः ।
क्वचित्सर्वक्षयोन्मुक्तस्थिरस्थावरजङ्गमः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो निरन्तर बह रही वायुओं के द्वारा ही स्थावर ओर जंगम भूत
उत्पन्न ही नहीं हुए हैं, तो कहीं पर विषादि रोगों के न रहने के कारण सर्वविनाश से निर्मुक्त
स्थावरजंगम भूत स्थिर हैं