Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
रम्ये रोदिमि मध्यस्थे पदार्थे यामि सौम्यताम् ।
हृष्याम्यशोभने दीना न जाने किमहं स्थिता ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं रम्य पदार्थ में रोती हूँ, मध्यवर्ती (न रम्य ओर न अरम्य ऐसे बीच के)
पदार्थ में सौम्य हो जाती हूँ, अरम्य प्रसंग मे यानी मूर्छा, जडता आदि अवस्था में प्रसन्न रहती हूँ,
क्योकि उस समय दीन हुई मैं क्या हूँ, यह नहीं जानती, उस स्थिति मेँ अहंकार का विलय हो जाने
से उसका दुःख जाना नहीं जा सकता