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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 71

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 64, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 71

संस्कृत श्लोक

आनीलपल्लवमृणाललतोत्पलानां कह्लारकुन्दकदलीदलमालतीनाम् । शय्या ममाङ्गचलनेन विशोषयन्त्या व्यर्थं गतानि नवयौवनवासराणि ॥ ७१ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, अत्यन्त नीलवर्णं तमाल के कोमल पल्लव, बिसतन्तुओं की लता, नील-रक्त कमल, कलार, कुन्द, कदलीपत्र ओर मालती के फूलों की बनायी गयी शय्याओं को अंगो के संचालन से सुखा रही मैंने अपने यौवन के अनेक दिन निरर्थक ही गँवा दिये