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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

स्थिरयौवनया दुःखान्येतानि मुनिनायक । भुक्तानि वर्षवृन्दानि पश्य दौर्भाग्यजृम्भितम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुनिश्रेष्ठ, स्थिर यौवनयुक्त मैंने अनेक वर्षों तक ये दुःख भोगे, मेरे दुर्भाग्य का विस्तार तो जरा देखिए