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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

एतावज्जन्मसाफल्यं सौभाग्यमविखण्डितम् । रसिकः पेशलाचारो यन्नार्यास्तरुणः पतिः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

स्त्रियो का सफल जन्म ओर अविखण्डित सौभाग्य यही हे कि तरुण, रसिक और कोमल बर्ताव करनेवाला पति हो