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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 65, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

उत्फुल्लाः कुसुमस्थल्यो नन्दनोद्यानभूमयः । धन्वायन्ते कुनाथानां विनाथानां च योषिताम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

विकसित फूलों के स्थान तथा नन्दन वनकी उद्यान भूमियाँ उन स्त्रियों को मरुभूमि के सदृश संताप पहुँचाती हैं, जिन स्त्रियों का पति प्रतिकूल है अथवा है ही नहीं