Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
अहो नु चित्रा मायेयं प्राक्प्रत्यक्षे परोक्षता ।
निर्णीतास्मिंस्त्वनध्यक्षे प्रत्यक्षकलनागता ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तब सभी लोगें को उम्र प्रत्यक्ष मे परोक्षता का अनुभव तथा अन्यत्र प्रत्यक्षता का अनुभव कैसे
होता हैं, इस पर कहते हैं
अहो, परमेश्वर की यह माया विचित्र है, प्राक् प्रत्यक्ष में (साक्षी चेतन की समष्टि मन की
प्रत्यक्षता में) परोक्षता हो रही है ओर इस अनध्यक्ष (अप्रत्यक्ष)मन में प्रत्यक्ष की कल्पना आ
गई