Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अथ पश्याम्यहं यावत्स्वस्यैवामलतेजसा ।
वस्तुतस्तु न चाकाशं नोपलः परमेव तत् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद जब मैं साक्षीरूप अपने ही निर्मल तेज से देखने लगा, तो मुझे वस्तुतः न तो
वह आकाश दीख पड़ा ओर न वह पत्थर ही वहाँ दीख पड़ा । उस समय सब कुछ मुझे परमार्थ ही
दीख पड़ा