Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यथा स्वप्ने सुमहती दृष्टा गेहगता शिला ।
व्योमैव केवलं तद्वत्सुशुद्धं चिन्नभःशिला ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न
में अपने घर के भीतर एक पत्थर के रूप से देखी गई विशाल शिला केवल चिदाकाशरूप ही है, वैसे
ही विशुद्ध केवल चिदाकाश ही वहाँ पत्थर शिला के रूप से स्फुरित हो रहा था