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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

बुध्यतामर्घ्यपाद्येन पूज्यतां मुनिपुङ्गवः । महन्महत्सपर्याभिर्महात्मभ्यो हि रोचते ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे स्वामिन्‌, आप यह जानिये कि ये मुनिश्रेष्ठ पूज्य हैं, इसलिए अर्घ्य, पाद्य आदि से इनकी पूजा कीजिये । जो बड़े-बड़े आपके सदृश महात्मा है, उन्हें उत्तम पूजा से प्राप्त होनेवाला महाफल ही रुचता हे