Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
शनैरुन्मीलयामास नयने नयकोविदः ।
मधुः शिशिरसंशान्ताववनौ कुसुमे यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर धीरे से उस नीतिज्ञ विद्वान ने अपने नेत्र उस तरह खोले,
जैसे मधुमास (वसन्त) शिशिर मे शान्त भूमिपर पुष्परूपी अपनी आँखें खोलता है