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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 7, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

विचित्रशाखा ऋतव उपशाखा दिशो दश । संविद्रसमहापूरो वातस्पन्दो निवर्तनः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

सब ऋतुएँ इसकी विचित्र शाखाएँ है, दसों दिशाएँ उपशाखार है, आत्मसंवित्‌ इसके जीवन के लिए रस की धारा है ओर सूत्रात्मा ही इसका वात स्पन्द है