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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 7, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 7, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

साधु विद्याधराधीश दिष्ट्या बुद्धोऽसि भूतये । भवान्धकूपकुहराच्चिरेणोत्थानमिच्छसि ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे विद्याधराधीश, हर्ष का विषय है कि आज तुम कल्याण के लिए भाग्यवशात्‌ जाग गये हो चिरकाल के बाद संसाररूपी अन्धकारपूर्णं कूपकुहर से आज तुम निकलने की चाह कर रहे हो