Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
दुर्भिक्षाकाण्डदौस्थित्यदैन्यदारिद्र्यदुर्भगा ।
दुःशीलाशेषवनिता निर्मर्यादनरावृता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश के
अकाण्डताण्डव, राजाओं एवं चोरों के उपद्रवो से जनित दीनता तथा दरिद्रता से उसका सारा वैभव
मिट्टी में मिल गया। उसमें समस्त स्त्रियाँ अपने सतीत्व से भ्रष्ट हो गई ओर मनुष्यों की सारी मर्यादा
नष्ट हो गई