Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अनार्यवसुधापाला तदनादृतपण्डिता ।
लोभमोहभयद्वेषरागरोगरजोरता ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय अनार्य ही समस्त पृथ्वी के रक्षक बन गये, पण्डितगण अनार्यो द्वारा विताडित
होने लगे, सारी भूमि में लोभ, मोह, भय, द्वेष, राग और रोगरूप धूलि उड़ने लगी