Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verses 30–31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verses 30–31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
बृहद्गुलुगुलावर्तगर्जनोद्द्रवकन्दराः ।
सीकरौघमहारम्भघनसंवलिताचलाः ॥ ३० ॥
चलच्चलचलद्वीरमकराघूर्णितान्तराः ।
उल्लसन्मकराक्रान्तद्रुमकाननितोदराः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े-
बड़े गुड-गुड शब्द करनेवाले आवर्तो द्वारा किये गये महान् गर्जन से उनकी पर्वत-कन्दराएं भयंकर
शब्द करने लगीं ओर जलकणों को (जलधारा ओं को) बरसाने वाले महामेघो से पर्वत भी डूबने लग
गये