Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
उत्फालमकरच्छन्ननभश्चरबृहद्धनाः ।
परस्परोर्मिसंघट्टभांकारकटुटांकृताः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्रों से उछले हुए मगरो ने आकाशगामी जीवों और बड़े-बड़े मेघमण्डलों को आच्छादित कर दिया
ओर तरगों के परस्पर आघातों से समुद्रो मे कठोर भयंकर शब्द होने लगा