Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
तटपर्वतलुण्टाकतरङ्गकरमण्डलाः ।
गर्जद्गिरिदरीगेहविशदुन्मत्तवारयः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्रो
ने अपनी विशाल तरंगो से तीरस्थ पर्वतं को चूर्णित कर दिया, गर्जना करते हुए पर्वतां के गुफारूपी
घरों पर उन्होने अपना अधिकार जमा लिया तथा उनका जल उन्मत्त-सा बन गया