Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
पातालतलताल्वन्तर्विस्फोटामोटनोद्भटः ।
चञ्चलाचलकीलोर्वी चचाल क्षणचालिता ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह ध्वनि विलक्षण भी, पातालतलरूप
तालु के भीतर विदारण हो जाने से वह ध्वनि मिलकर जोर पकड़ रही थी यानी घन थी, फिर पृथ्वी
को बराबर जकड़ रखने के लिए स्थापित हुए महापर्वत आदि कीलं हिल गयी ओर एक क्षण में अपने
स्थान से च्युत हो गई । अनन्तर क्षण भर मे चंचल समुद्रतरगों से हिलायी गई वह पृथ्वी ऐसे प्रतीत
होने लगी, जैसे चंचल शैवाल की लता हो