Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 72, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मा संकल्पमात्रात्मा निराकृतिरिदं स्थितम् ।
जगदित्येव जातो मे निश्चयः कथयेतरत् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, मेरा व्यक्तिगत निश्चय तो यह है कि यह
संकल्पमात्रस्वरूप ब्रह्माजी निराकार हैं और यह जगत् साकार है । इसलिए यदि इस विषय में इसमें
अन्य कोई दूसरा तरीका हो, तो मुझसे कहिए