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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

सनातन इति प्रोक्तो रुद्र इत्यपि संज्ञितः । इन्द्रोपेन्द्रमरुन्मेघशैलजालादिदेहकः ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

सनातन पुरुष भी यही कहे गये हैं, इन्हीं की रुद्र संज्ञा पडी है तथा हे श्रीरामचन्द्रजी, इन्द्र, उपेन्द्र, पवन, मेघ तथा पर्वतसमूहों की देह भी यही है