Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अग्निलोकस्तथौर्वाग्निः पित्तमस्यातिदुःसहम् ।
वातस्कन्धमहावाताः प्राणापाना हृदि स्थिताः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
अग्निलोक तथा पृथिवी के अन्दर की अग्नि इसका
अतिदुःसह पित्त है । वातस्कन्धो में प्रसिद्ध जो आवह, निवह, प्रवह आदि महावात हैं वे इसके
हृदय में स्थित प्राण ओर अपान हैं