Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
सर्वस्थलालयचलद्दह्यमानजनव्रजम् ।
क्षीणाक्रन्दक्वथद्भूतगणदुर्वासदिक्तटम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
सभी स्थानों में अपने-अपने घरों के
भीतर उसके ताप से जल रहा जन-समुदाय इधर-उधर जोरों से भाग रहा था । मरे हुए तथा
आक्रन्दनपूर्वक खूब पकाये जा रहे प्राणिसमुदाय से वह सारे दिकृतटों को दुरगन्धयुक्त बना रहा
था