Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
ववुरशनिनिपातपीडिताङ्गाः कचदनलोल्मुकगुल्ममण्डलाभाः ।
प्रलयसमयवायवोऽनलान्ताद्दलदमरावलयो लये लिहन्तः ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रकाशमान अग्नि के उल्मुकं से संयुक्त होने के कारण गुल्ममण्डलों (५) के सदृश शोभायमान
प्रलयसमय के पवन-देवताओं की पंक्तियों को विदलित करते हुए अग्नि के बीच से निकलकर
सारी दिशाओं को चाटते हुए-से बहने लगे