Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

कुर्वज्जलाद्रिनिष्पेषैर्दिक्पालपुरकुट्टनम् । निपतद्देवदैत्येन्द्रसिद्धगन्धर्वपत्तनम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय जल के पर्वताकार तरगों के आघातों से दिक्पालों के नगर कुटे जा रहे थे ओर देव, दैत्य, इन्द्र, सिद्ध तथा गन्धर्वो के नगर छिन्न-भिन्न होकर पतनोन्मुख हो रहे थे