Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
महाप्रवाहवार्योघघोषघुंघुमिताम्बरः ।
एकप्रवाहमहितसव्योमकुलपर्वतः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
भारी प्रवाह से युक्त जल के ओघ से जो भयंकर घोष हो रहा था, उससे आकाश
को भी वह सावधान कर रहा था । अपने एक ही प्रवाह मे उसने आकाश सहित सातां कुलपर्वत
को अपने उदर में कर लिया