Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तृणैरिव तरङ्गेषु दोलान्दोलनमद्रिभिः ।
कुर्वद्भिरुपलाघातभग्नभास्करमण्डलः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तरगों पर जैसे तृण झूलते हैं, वैसे ही उसकी तरगों पर महान् पर्वत झूल
रहे थे, इन झूला झूल रहे पर्वतां के द्वारा पत्थरों को फेंककर वह सूर्य-मण्डल को भी नष्ट कर रहा
था