Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 79, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
यावद्दृष्टो मया तत्र शैलादिव विनिर्मितः ।
परमेष्ठी समाधिस्थः प्रधानपरिवारवान् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
इतने में मैने प्राणादि-उपासनाओं के
द्वारा सालोक्यादि मुक्ति को प्राप्त हुए तथा ब्रह्माजी के साथ विदेह कैवल्य प्राप्त करने की इच्छा
कर रहे जीवन्मुक्त परिवार के ()) सहित ब्रह्माजी को पर्वत से विनिर्मित हुए-सा देखा